माना कि तुम

माना कि तुम

माना कि तुम जीते हो ज़माने के लिये, एक बार जी के तो देखो हमारे लिये, दिल की क्या औकात आपके सामने, हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये...
रग-रग में इस तरह

रग-रग में इस तरह

रग-रग में इस तरह से समा कर चले गये, जैसे मुझ ही को मुझसे चुराकर चले गये, आये थे मेरे दिल की प्यास बुझाने के वास्ते, इक आग सी वो और लगा कर चले...
राह में संग चलूँ

राह में संग चलूँ

राह में संग चलूँ ये न गँवारा उसको, दूर रहकर वो करता है इशारे बहुत, नाम तेरा कभी आने न दिया होंठों पर, यूँ तेरे जिक्र से शेर सँवारे हैं...
माना कि तुम

माना कि तुम

माना कि तुम जीते हो ज़माने के लिये, एक बार जी के तो देखो हमारे लिये, दिल की क्या औकात आपके सामने, हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये...
होती है है जब खफा

होती है है जब खफा

होती है जब खफा, मुझसे बात भी नहीं करती है, देर रात तक लेकिन मेरा वो इंतजार करती है, निराला सा अंदाज है इश्क में दिलबर का मेरे, पहले खुब डाँट लेती है फिर दिल से प्यार करती...

Pin It on Pinterest